Shiv Tandav Stotram Lyrics In Hindi And English | Shiv Tandav Stotram

Shiv Tandav Stotram Lyrics In Hindi And English | Shiv Tandav Stotram

शिव तांडव स्तोत्रम | Read Shiv Tandav Stotram Lyrics In Hindi And English :

Before starting shiv tandav  in hindi and english language know the meaning of shiv tandav stotram ( शिव तांडव स्तोत्रम शुरू करने से पहले शिव तांडव का अर्थ जान लें ) |

शिव तांडव स्तोत्र बहुत ही लाभकारी और प्रभावशाली जप है। जो भी शिव जी के इस स्तोत्र को सच्चे मन् से जपता है उसके ऊपर शिव जी का आशीर्वाद तथा कृपा हमेशा बनी रहती है |

रावण जो की लंका का राजा था, वे शिव जी के बहुत बड़े भक्त थे। रावण एक बहुत बड़ा पंडित तथा तपस्वी था जिसने कई बार अपनी तपस्या के माध्यम से शिव जी से कई वरदान प्राप्त किए है | क्या आप जानते है की शिव तांडव की रचना किसने की है |

हम आपको इस पोस्ट के माध्यम से शिव तांडव स्तोत्रम के बारे में पूरा वर्णन करेंगे | शिव तांडव की रचना करने वाला कोई और नहीं बल्कि लंकापति रावण थे | 

आप ये तो जान गए कि शिव तांडव स्तोत्र की रचना रावण ने की थी लेकिन क्या आप ये जानते है की इसकी रचना क्यों हुई थी तथा किस कारण हुई थी | रावण में कई वरदान तथा शक्तियाँ विद्यमान थी, जिसके कारण उसके भीतर अहंकार पैदा हो गया था | 

एक समय की बात है, रावण ने शिव जी को अपनी शक्तिओ का प्रदर्शन दिखाने के लिए कैलाश पर्वत को अपनी भुजाओं से उठा लिए था | रावण शयद यह भूल गये थे कि जिसको वह अपनी शक्तिओ का प्रदर्शन दिखा रहा है वे देवों के देव महादेव है | 

रावण के अहंकार तथा भ्रम को नष्ट करने के लिए शिव जी ने अपनी शक्तिओ से कैलाश पर्वत के भार को कई गुना बढ़ा दिया | पर्वत का भार बढ़ने के कारण रावण की भुजाये कमजोर पड़ने लगी, तथा अन्त में रावण अपने प्रदर्शन में असमर्थ हो गया | 

इस प्रकार रावण को अपनी गलती तथा भ्रम का आभास हुआ | गलती का आभास होने के अंतर्गत रावण ने उसी क्षण शिव तांडव स्तोत्र की रचना करी तथा शिव जी को सुनाई | 

शिव जी रावण द्वारा बनाए गए तांडव स्तोत्र से बहुत प्रसन्न हुए तथा रावण को उनकी इच्छा के अनुसार वरदान भी दिया | हम इस पोस्ट के माध्यम से आपके साथ शिव तांडव स्तोत्र का हिन्दी तथा इंग्लिश में वर्णन करेंगे | 

शिव जी के भक्तो के लिए हमने शिव तांडव स्तोत्र की पीडीऍफ़ तथा लिरिक्स इमेज बनाई है, जिसके माध्यम से आप शिव तांडव स्तोत्र को ऑफलाइन भी पढ़ सकते है | पीडीऍफ़ था लिरिक्स इमेज को डाउनलोड करने का लिंक हमने पोस्ट के मध्य में दिया है | 

सबसे पहले हम शिव तांडव स्तोत्र के बोल का हिंदी में वर्णन करेंगे, फिर उसके बाद अंग्रेजी में। आइए अब एक साथ शिव तांडव स्तोत्र के बोल का जाप करें।

Meaning In English :

Shiv Tandav Stotra is very beneficial and effective chanting. Whoever chants this stotra of Shiva with a sincere heart, the blessings and grace of Shiva always remain on him.


Ravana, who was the king of Lanka, was a great devotee of Shiva. Ravana was a great pundit and ascetic who received many boons from Shiva through his penance many times. Do you know who composed the Shiva Tandava?


We will give you complete description about Shiv Tandava Stotram through this post. The creator of Shiva Tandava was none other than Lankapati Ravana.


You know that Shiva Tandava Stotra was composed by Ravana, but do you know why it was composed and for what reason? Many boons and powers were present in Ravana, due to which ego was born in him.


Once upon a time, Ravana lifted Mount Kailash by his arms to show Shiva the display of his powers. Ravana may have forgotten that the one to whom he is showing the performance of his powers is Mahadev, the God of gods.


In order to destroy the ego and illusion of Ravana, Shiva increased the weight of Mount Kailash manifold with his powers. Ravana's arms began to weaken due to the increase in the weight of the mountain, and in the end Ravana was unable to perform.


Thus Ravana realized his mistake and confusion. Realizing the mistake, Ravana composed the Shiva Tandava Stotra at that very moment and narrated it to Shiva.


Shiva was very pleased with the Tandava Stotra composed by Ravana and also granted a boon to Ravana as per his wish. We will describe Shiv Tandav Stotra in Hindi and English with you through this post.


For the devotees of Shiva, we have created pdf and lyrics image of Shiv Tandav Stotra, through which you can read Shiv Tandav Stotra offline as well. We have given the link to download pdf tha lyrics image in the middle of the post.


First we will describe the lyrics of Shiv Tandav Stotra in Hindi, then in English. Let us now chant the lyrics of Shiv Tandav Stotra together.

Read Shiv Tandav Stotram Lyrics In Hindi | शिव तांडव स्तोत्रम के बोल हिंदी में पढ़ें :

|| शिव तांडव स्तोत्रम ||

जटाटवीगलज्जल प्रवाहपावितस्थले
गलेऽवलम्ब्य लम्बितां भुजंगतुंगमालिकाम्‌।

डमड्डमड्डमड्डमनिनादवड्डमर्वयं
चकार चंडतांडवं तनोतु नः शिवः शिवम ॥1॥

जटा कटा हसंभ्रम भ्रमन्निलिंपनिर्झरी 
विलोलवी चिवल्लरी विराजमानमूर्धनि ।

धगद्धगद्ध गज्ज्वलल्ललाट पट्टपावके
किशोरचंद्रशेखरे रतिः प्रतिक्षणं ममं ॥2॥

धरा धरेंद्र नंदिनी विलास बंधुवंधुर-
स्फुरदृगंत संतति प्रमोद मानमानसे ।

कृपाकटा क्षधारणी निरुद्धदुर्धरापदि
कवचिद्विगम्बरे मनो विनोदमेतु वस्तुनि ॥3॥

जटा भुजं गपिंगल स्फुरत्फणामणिप्रभा-
कदंबकुंकुम द्रवप्रलिप्त दिग्वधूमुखे ।

मनो विनोदद्भुतं बिंभर्तु भूतभर्तरि 
मदांध सिंधु रस्फुरत्वगुत्तरीयमेदुरे॥4॥

सहस्र लोचन प्रभृत्य शेषलेखशेखर-
प्रसून धूलिधोरणी विधूसरांघ्रिपीठभूः ।

भुजंगराज मालया निबद्धजाटजूटकः
श्रिये चिराय जायतां चकोर बंधुशेखरः ॥5॥

ललाट चत्वरज्वलद्धनंजयस्फुरिगभा-
निपीतपंचसायकं निमन्निलिंपनायम्‌ ।

सुधा मयुख लेखया विराजमानशेखरं
महा कपालि संपदे शिरोजयालमस्तू नः ॥6॥

कराल भाल पट्टिकाधगद्धगद्धगज्ज्वल-
द्धनंजया धरीकृतप्रचंडपंचसायके ।

धराधरेंद्र नंदिनी कुचाग्रचित्रपत्रक-
प्रकल्पनैकशिल्पिनि त्रिलोचने मतिर्मम ॥7॥

नवीन मेघ मंडली निरुद्धदुर्धरस्फुर-
त्कुहु निशीथिनीतमः प्रबंधबंधुकंधरः ।

निलिम्पनिर्झरि धरस्तनोतु कृत्ति सिंधुरः
कलानिधानबंधुरः श्रियं जगंद्धुरंधरः ॥8॥

प्रफुल्ल नील पंकज प्रपंचकालिमच्छटा-
विडंबि कंठकंध रारुचि प्रबंधकंधरम्‌

स्मरच्छिदं पुरच्छिंद भवच्छिदं मखच्छिदं
गजच्छिदांधकच्छिदं तमंतकच्छिदं भजे ॥9॥

अगर्वसर्वमंगला कलाकदम्बमंजरी-
रसप्रवाह माधुरी विजृंभणा मधुव्रतम्‌ ।

स्मरांतकं पुरातकं भावंतकं मखांतकं
गजांतकांधकांतकं तमंतकांतकं भजे ॥10॥

जयत्वदभ्रविभ्रम भ्रमद्भुजंगमस्फुर-
द्धगद्धगद्वि निर्गमत्कराल भाल हव्यवाट्-

धिमिद्धिमिद्धिमि नन्मृदंगतुंगमंगल-
ध्वनिक्रमप्रवर्तित प्रचण्ड ताण्डवः शिवः ॥11॥

दृषद्विचित्रतल्पयोर्भुजंग मौक्तिकमस्रजो-
र्गरिष्ठरत्नलोष्टयोः सुहृद्विपक्षपक्षयोः ।

तृणारविंदचक्षुषोः प्रजामहीमहेन्द्रयोः
समं प्रवर्तयन्मनः कदा सदाशिवं भजे ॥12॥

कदा निलिंपनिर्झरी निकुजकोटरे वसन्‌
विमुक्तदुर्मतिः सदा शिरःस्थमंजलिं वहन्‌।

विमुक्तलोललोचनो ललामभाललग्नकः
शिवेति मंत्रमुच्चरन्‌कदा सुखी भवाम्यहम्‌॥13॥

निलिम्प नाथनागरी कदम्ब मौलमल्लिका-
निगुम्फनिर्भक्षरन्म धूष्णिकामनोहरः ।

तनोतु नो मनोमुदं विनोदिनींमहनिशं
परिश्रय परं पदं तदंगजत्विषां चयः ॥14॥

प्रचण्ड वाडवानल प्रभाशुभप्रचारणी
महाष्टसिद्धिकामिनी जनावहूत जल्पना ।

विमुक्त वाम लोचनो विवाहकालिकध्वनिः
शिवेति मन्त्रभूषगो जगज्जयाय जायताम्‌ ॥15॥

इमं हि नित्यमेव मुक्तमुक्तमोत्तम स्तवं
पठन्स्मरन्‌ ब्रुवन्नरो विशुद्धमेति संततम्‌।

हरे गुरौ सुभक्तिमाशु याति नांयथा गतिं
विमोहनं हि देहना तु शंकरस्य चिंतनम ॥16॥

पूजाऽवसानसमये दशवक्रत्रगीतं
यः शम्भूपूजनमिदं पठति प्रदोषे ।

तस्य स्थिरां रथगजेंद्रतुरंगयुक्तां
लक्ष्मी सदैव सुमुखीं प्रददाति शम्भुः ॥17॥


॥ इति शिव ताण्डव स्तोत्रं संपूर्णम्‌॥

Shiv Tandav Stotram Lyrics In Hindi |  शिव तांडव स्तोत्रम के बोल हिंदी में :

|| Shiv Tandav Stotram || 

Jatataveeglajjal Pravahpaavitsthale galedavlambyah Lambita  bhujangtungmaalikamai |
Damdamdamninadavdamarvaye chkaar chandtaantav tanotu Na shiv Shivam ||1||


jtaa ktaa hsambhram bhramannilimpnirjhari Vilolavi chivallari virajmaanmurdhani |
Dhgadhhgadhh gajjwal lallaat patpaawke kishor chandrashekhre rtii pratikshan mm || 2 ||


Dhra dhrendra nandini vilas bandhuvandhur sfurhangat  santiti pramod manmanse |
Kripakataa shdhaarni nirudhh - dhurdhrapadi kavchvidigambare mano vinodmetu vastuni || 3 ||


jataa bhuj gapingul sfuratfnaamniprabha - kadambakunkum dravpralipt digvdhumukhe |
Mdaandh sindhu rasfuratvgutriyamedure mano vinod dbhut bimbhartu bhootbhartari || 4 ||


Sahastra lochan prabhutya sheshlekhshekhar prasun dhulidhorni vidhoosranghripeethbhu |
Bhujangraaj maalyaa nibadhjaatjutak shriye chiraaye jaayta chkor bandhushekhar || 5 ||


Llaat chatv rajv ladhh nanjyasfurigbha nipeet - panchsaayak nimanni - limpnaayam |
Sudha mayukh lekhyaa viraajmaanshekhar mhaa kpaali sampade shirojayaa - lamastu na || 6 ||


kraal bhaal pattikaadh - gadhgadh gajjw - ladhnanjayaa dharikrit prachand panchsaayke |
Dharaa dharendra nandini kuchagra chitrapatrak prakalpnaik shilpini trilochane matirmam || 7 ||


Naveen megh mandali nirudh - durdhar - sfurt kuhu nishithineetam prabandhbandhukandhar  | 
Nilampanirjhari dhrast notu kritti sindhur kalaanidhanbandhur shriya jagand dhurandhar || 8 ||


Prafull neel pankaj prapanchkaa limachtaa vidambii kath kandh raaruchi prabandh kandhram |
 smarachidd purachind bhavachid mukhachid gajachi daandh kachid tmant kachid bhaje || 9 ||


Agarv sarvmangalaa kalaak damb manjarii raspravaah maadhuri vijhrimbhnaa madhu vratam |
Smaraantak puratak bhaavantak  mkhaantak gjaant kaandh kaantak tamant kaantak bhje || 10 ||


jayatv dbhravi bhram bhramad bhujang masfu radh gadh gdvi nirgamtakraal bhaal havyavaat |
dhimidhhi midhhimi nanmri dangtung mangal dhwanikram pravartit prachand taandav shiv || 11 ||


Hrishdvii chitra talpayorbhujang moktikmastrajo garishth ratn loshtayo suhradvi paksh pakshayo |
Trina ravindra chakshusho prajaamahi mahendrayo sam pravart yanman kdaa sdaashiv bhaje || 12 ||


Kdaa nilimp nirjharii nikujkotre vasan vimukt durmati sdaa shir sthamanjali vhn |
Vimuktlollochano lalaambhaallangak shiveti mantramuccharnakda sukhi bhvaamyaham || 13 ||


Nilimp naathnaagri kdamb molmallika nigumphnirbhakshranm dhushnikaamnohar |
Tnotu nu manomud vinodinimmhanish parishraya pr pd tadangjatvisha chya || 14 ||

Prachand vaadvaanal prabhaashubhpracharni mhaashtsidhhikaamini jnaavahoot jalpanaa |
Vimukt vaam lochano vivaahkaalikdhwanii shiveti mantbhooshgo jagajjyaay jaaytaam || 15 ||


Im hi nityamev muktmuktmottam stav pathannsmaran bruvannaro vishudhmeti santtam |
Hare guro subhaktimaashu yaati naayshaa gatii vimohan hi dehna tu shankrasya chintnam || 16 ||


Poojadvsaansamye dashvakratrageet ya shambhupoojanmid pathti pradoshe |
Tasya sthira rathgajendraturangyukta lakshami sdaiv sumukhi prad daati shambhu || 17 ||

Iti shiv tandav stotra sampurn ||

Benefits of reciting Shiv Tandav Stotra | शिव तांडव स्तोत्र के पाठ के लाभ :

  • Increases mental power
  • Brings happiness and prosperity
  • Protection from evil forces
  • Shiva's grace remains on you
  • Negative thoughts go away

Best time to read shiv tandav stotra |  शिव तांडव स्तोत्र को पढ़ने का सही समय :

You can read Shiv Tandava Stotra at any time, there is no hindrance in it, but it is considered auspicious to recite Shiva Tandava Stotra in the evening.


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अगर आप शिव तांडव स्तोत्रम लिरिक्स की पीडीऍफ़ डाउनलोड करना चाहते हैं, तो आप इस पोस्ट के माध्यम से पीडीऍफ़ डाउनलोड कर सकते हैं। बोल की पीडीऍफ़ को डाउनलोड करने के लिए निचे दिए गए डोनलोड बटन पर क्लिक करे |

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FAQ | अक्सर पूछे जाने वाले सवाल :

1). शिव तांडव की रचना किसने की थी ?
उत्तर : शिव तांडव की रचना लंकापति रावण ने थी |

2). शिव तांडव क्यों करते हैं?

उत्तर : शिव जी ताण्डव दो प्रकार का करते है |

(i). क्रोधित ताण्डव - जब शिव जी बहुत ज़्यादा क्रोधित होते है तब वे क्रोधित तांडव करते है | इस तांडव के अंतर्गत शिव जी अपनी तीसरी आँख खोल लेते है | इनके सामने यदि कोई भी जीव, जंतु, वस्तु आदि सामने आती है तो वे इन्हें भस्म कर देते है | 

(ii). आनन्दित तांडव - जब शिव जी आनंद में होते है तब वे आनंदित तांडव करते है | आनन्दित ताण्डव शिव जी अपने डमरू के साथ करते है |

3). यह तांडव क्या है ?

उत्तर : शिव तांडव भगवान शिव द्वारा किया जाने वाला एक प्रकार का नृत्य है। इसमें हर्षित और क्रोधित तांडव शामिल है।

4). तांडव और लास्य में क्या अंतर है ?

उत्तर : तांडव और लास्य नृत्य हैं। जो मुख्य रूप से देवताओं द्वारा किया जाता है। यदि देवी नृत्य करे तो वह लास्य कहलाता है, अगर यदि देवता नृत्य करे तो वह ताण्डव कहलाता है |

5). तांडव कितने प्रकार के होते हैं ?

  • शिव तांडव
  •  कृष्णा ताण्डव 
  • गोरी ताण्डव 
  • उमा ताण्डव 
  • कालिका ताण्डव 
  • त्रिपुरा तांडव 
  • समरा तांडव
  •  संध्या तांडव
  •  आनंद तांडव

5). रावण ने भगवान शिव को कैसे प्रसन्न किया ?

उत्तर : शिव जी को प्रसन्न करने के लिए रावण ने रुद्राष्टक की रचना कर डाली | रुद्राष्टक के जाप से रावण ने शिव जी को प्रसन्न कर दिआ तथा शिव जी ने रावण को मनचाहा वरदान दिया |

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